कफ़न
"कफ़न" एक माशहूर हिंदी कहानी है जो उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई है। यह कहानी मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है और भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। "काफ़न" को उन्होंने 1922 में लिखा था।
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मधुकर के परिवार में एक बुढ़िया भी है, जिसका नाम बुढ़िया अम्मा है। वह सभी को प्यारी हैं, लेकिन वे सभी उसके परिवार के संचालन से नाराज हो जाते हैं और उसे गलत काम करने के लिए मजबूर कर देते हैं। उसे शिक्षा मिलने से रोक दिया जाता है, और वह सिर्फ काम करने के लिए उपलब्ध होती है।
कहानी में बताया जाता है कि एक दिन मधुकर की बुढ़िया अम्मा की मृत्यु हो जाती है और उसके अंतिम संस्कार के लिए एक कफ़न की आवश्यकता होती है। लेकिन परिवार की गरीबी के कारण, वे कफ़न खरीदने के लिए परवाह नहीं कर सकते। मधुकर चाचा से यह पूछता है कि क्या वो अम्मा का कफ़न खरीदने के लिए पैसे देने को तैयार है।
इस पर, चाचा उससे एक सवाल पूछते हैं जो उसके मन को चुनौती देता है: "अगर तेरे पास पैसे होते तो तू क्या कफ़न खरीदता?" मधुकर यह सोचता हैं कि चाचा उससे एक उदाहरण देना चाहते हैं, और उसका उत्तर देने में वह समय लगा देता है। इस उत्तर देने के प्रक्रिया में, वह अपने सोचने का तरीका और जीवन की सच्चाई को समझता है।
"कफ़न" एक दर्दनाक और समाज सुधारक कहानी है, जो भारतीय समाज के गरीबी, सामाजिक विभेद, और संघर्ष को दर्शाती है। इसमें एक गरीब ब्राह्मण परिवार के दुख, दरिद्रता, और संघर्ष का वर्णन है, जिससे पाठकों को समाज में न्याय की महत्वपूर्णता का अनुभव होता है।
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